सफेद बाघों वाला दुनिया का पहला सफारी सतना के मुकुंदपुर में जनता के लिए खोल दिया गया। बिलौटा जाति के इस सदस्य यानी सफेद बाघ को विंध्य के इस इलाके में तकरीबन १०० साल पहले सबसे पहले खोजा गया था । यह सफारी ५० करोड़ रुपये की लागत पर २५ हेक्टेयर इलाके की जमीन तक फैला हुआ है । इस सफारी का लोकार्पण मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया | इस ऐतिहासिक दिन को मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह एमपी के लिए गर्व की बात है । मुकुंदपुर में यहां दुनिया का पहला वाइट टाइगर सफारी है ।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विंध्य ने दुनिया को सबसे पहला सफेद बाघ दिया है। लेकिन सफेद बाघ विराट की मौत १९७६ में होने के बाद इस इलाके की विशेषता छीन गई थी | लेकिन फिर से यह गौरव चालिस साल बाद लौट आया है | यहां प्रदेश के लोगों के लिए रोजगार के मौके भी मिलेंगे। यह सफारी एक हफ्ता तक लोगों के लिए निशुल्क रहेगा | इसका नाम रीवा के महाराजा मार्तंड सिंह के नाम पर होगा।
सपना सफारी के रूप में साकार
प्रदेश के लोगो को लम्बे समय से यह सफारी का सपना था की उन्हें सफेद बाघों को फिर से देखने को मिले | आज वह सपना पूरा हुआ है | उन्होंने कहा कि एक सम्मेलन में भाग लेने दुनिया के १२ देशों से नेता आएंगे जहां के चिडि़याघरों में सफेद बाघ रहते हैं। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
रघु, विंध्य और राधा का सफारी में रहेगा जलवा
एमपी के जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सफारी एक सफेद बाघ है जिसको जनता के लिए अधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है | एक नर बाघ जिसका नाम रघु है और दो मादाये जिसका नाम विंध्य और राधा है | यहां दो रॉयल बंगाल टाइगर्स भी हैं। आने वाले समय में यहाँ नौ और सफेद बाघ भी होंगे | उन्होंने कहा कि पिछले साल सफारी में सबसे पहले भोपाल से सफेद बाघ विंध्य और दो भालू लाए गए थे। बाद में भिलाई स्थित मैत्री जू से दो और सफेद बाघ राधा और रघु को लाया गया था |इसके अलावा इस साल महाराष्ट्र के औरंगाबाद जू से दो रॉयल बंगाल टाइगर भी लाए गए।
(मोहन के वंशज) दुनिया के सभी सफेद बाघ
सरकार की योजना के अनुसार मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया की गोविंदगढ़ में सफेद बाघों के लिए ब्रीडिंग सेंटर बनाया जाएगा। मध्य प्रदेश के इसी विंध्य क्षेत्र में १९१५ में सफेद बाघ देखा गया था। बिलौटा परिवार के दुर्लभ प्रजाति के इस सफेद बाघ को पहली बार पकड़ा गया जिसकी मौत १९२० ई० में हो गई | १९५१ ई० में सफेद बाघ के एक बच्चे को पकड़ा गया। उसका नाम मोहन रखा गया। दुनिया के जितने भी सफेद बाघ हैं वे सभी उसी के वंशज हैं।इनकी ब्रीडिंग सेंटर की व्यवस्था महाराजा मार्तंड सिंह ने की थी।
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